Sunday, March 8, 2009

जिंदगी

जिंदगी से जिंदगी भर गम पाये !
अब जिंदगी को थोड़ा गम दिया जाये !!

हर आँख नम करना चाहती है ये ,
हमें रुलाके हमपे हँसना चाहती है ये !
अब थोड़ा हँसके इसको रुलाया जाये,
अब जिंदगी को थोड़ा गम दिया जाये !!

ये जिंदगी ! देख ले, खुश है हम भी,
बेकार हुआ तेरा दिया ये गम भी !
खुशियों का थोड़ा नाटक किया जाये ,
अब जिंदगी को थोड़ा गम दिया जाये !!

हार जायेगी जिंदगी एक दिन देखना ,
मांगेगी रहम हमसे एक दिन देखना !
क्यों ना अब मौत को जिताया जाये,
अब जिंदगी को थोड़ा गम दिया जाये !!

इसकी आँखों में भी नमी तब होगी,
बाहों में हमारी मौत जब होगी !
फ़िर भी इसपे ना तरस खाया जाये ,
अब जिंदगी को थोड़ा गम दिया जाये !!

जिंदगी से जिंदगी भर गम पाये !
अब जिंदगी को थोड़ा गम दिया जाये !!


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